Palitana 5 Chaityavandan In Hindi [work] Full Jun 2026

3. तृतीय चैत्यवंदन: पुंडरीक स्वामी (प्रथम गणधर)

चैत्यवंदन की सामान्य विधि प्रणाम:

यह स्थान वह है जहाँ भगवान आदिनाथ ने निन्यानवे बार समवसरण किया था। यहाँ रायण वृक्ष के नीचे प्रभु के प्राचीन चरण पादुकाएं स्थित हैं。 Tattva Gyan स्थान:

पर्वत चढ़ते समय सांसारिक बातें करने के बजाय मन ही मन 'नमोकार मंत्र' या 'ॐ ह्रीं श्रीं शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नमः' / 'आदिनाथ दादा' का जाप करें। palitana 5 chaityavandan in hindi full

शीतल छाया पेड़ की, शीतल प्रभु के चरण,भवाभव के दुःख काट के, लीजे थारो शरण।पगला पूजूं प्रेम से, भाव धरीने शुद्ध,रायण नीचे बैठ के, पामूँ आत्म बुद्ध।। 2 ।।

"आदिदेव अलवेसरु, विनितानो राय; नाभिराया कुल मंडणो, मरुदेवा माय।"

यह तीर्थ की तलहटी में स्थित है। यात्रा शुरू करने से पहले यहाँ वंदन करना अनिवार्य माना जाता है。 स्थान: शीतल प्रभु के चरण

| क्रम | स्थान | आध्यात्मिक लाभ | |------|--------|------------------| | 1 | मूलनायक | क्रोध का नाश | | 2 | कुमारपाल टेक | मान (अहंकार) का नाश | | 3 | आनंदसागर | माया (छल) का नाश | | 4 | भक्ति भवन | लोभ का नाश | | 5 | मोक्ष टेक | |

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रायण तरुवर सोहामणो, प्रभुवर चरण निवास,सुरनर किन्नर आवीने, पूरे मन की आस।भरत चक्रवर्ती ने जहाँ, समकित पायो सार,चरण कमल 'आदिनाथ' के, वंदू वारंवार।। 1 ।। भवाभव के दुःख काट के

यात्रा करते समय मौन रहना या केवल धार्मिक भजन गाना उत्तम है।

श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरी ने जे चढ़े, तेने भव पार उतारे।अनंत सिद्धाणो आहे ठाम, सकल तीर्थनो राय;पूर्व नवाणुं ऋषभदेव, ज्यां ठाव्या प्रभु पाय।सूरजकुंड सोहामणो, कावड़ियाक्ष अभिराम;नाभिराय कुल मंडणो, जिनवर करूं प्रणाम।

आदिदेव अलबेसरु, विनीतानी राय;नाभिराया कुल मंडणो, मरुदेवा माय।पांचशे धनुषनी देहड़ी, प्रभुजी परम दयाल;चौराशी लाख पूर्वनी, जस आयु विशाल।वृषभ लांछन जिन वृषभधरु ए, उत्तम गुण मणि खाण;तस पद 'पदम' सेवण थकी, लहिये अविचल ठाण।

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