अपराध के आघात से उबरने के लिए पीड़ितों को चिकित्सा, परामर्श और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
इस लेख को PDF के रूप में कैसे सुरक्षित करें?
दण्डशास्त्र (Penology) और पीड़ितशास्त्र (Victimology) अपराधशास्त्र (Criminology) की दो महत्वपूर्ण शाखाएँ हैं। यह दोनों विषय अपराध, अपराधी, समाज और पीड़ित के बीच के अंतर्संबंधों का अध्ययन करते हैं। जहाँ कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए दण्डशास्त्र आवश्यक है, वहीं न्याय को पूर्ण बनाने के लिए पीड़ितशास्त्र की भूमिका अपरिहार्य है।
"प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट, 1958" के तहत अपराधियों को रिहा करने के न्यायालय के अधिकार. penology and victimology pdf in hindi
असमर्थन (Incapacitation): अपराधी को समाज से अलग कर देना (जैसे जेल) ताकि वह और अपराध न कर सके।
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत अदालतों को यह अधिकार है कि वे अपराधी पर लगाए गए जुर्माने का कुछ हिस्सा पीड़ित को मुआवजे के रूप में दें।
इन संसाधनों को प्रभावी ढंग से खोजने के लिए, Google, Bing, या DuckDuckGo पर निम्नलिखित कीवर्ड का उपयोग करें: penology and victimology pdf in hindi
4. दण्डशास्त्र और पीड़ितशास्त्र में अंतर्संबंध (Relationship Between Penology & Victimology)
इसका मानना है कि "अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं।"
: इस सिद्धांत का मुख्य उद्देश्य अपराधों को रोकना है। कड़ी सजा का प्रावधान करके अपराधी और समाज के अन्य लोगों के मन में अपराध करने का भय पैदा किया जाता है। सीज़र बेकरिया (Cesare Beccaria) इस सिद्धांत के प्रमुख समर्थक थे। penology and victimology pdf in hindi
पीड़ित और समाज को यह विश्वास दिलाना कि कानून सर्वोच्च है।
आज की न्याय प्रणाली 'प्रतिशोधात्मक' से 'सुधारात्मक' और 'पीड़ित-केंद्रित' (Victim-centric) न्याय की ओर बढ़ रही है। दंडशास्त्र का लक्ष्य अपराधी को बेहतर इंसान बनाना है, जबकि पीड़ित विज्ञान यह सुनिश्चित करता है कि अपराध का शिकार व्यक्ति अकेला न छूटे।
के बारे में विस्तार से बता सकता हूँ।
यदि आप इस लेख का व्यवस्थित संकलन चाहते हैं, तो आप इसे कॉपी करके अपने पास के रूप में सुरक्षित कर सकते हैं, जो आपकी शैक्षणिक यात्रा में अत्यधिक सहायक सिद्ध होगा।